** ई‑कोर्ट मिशन मोड परियोजना के अंतर्गत “ई‑फाइलिंग 3.0: प्रक्रिया से व्यवहार तक” विषयक कार्यशाला आयोजित
Naitik Chakravarti Times
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** ई‑कोर्ट मिशन मोड के तहत न्यायिक प्रबंधन को डिजिटल बनाने के लक्ष्य से “ई‑फाइलिंग 3.0” पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें न्यायपालिका, बार, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
** भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ई‑कोर्ट मिशन मोड परियोजना का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज़, पारदर्शी और सुलभ बनाना है। इस दिशा में, न्यायालयों में कागज़ी दस्तावेज़ों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलने के लिए “ई‑फाइलिंग 3.0: प्रक्रिया से व्यवहार तक” नामक नई पहल का परिचय दिया गया है। इस पहल के अंतर्गत फाइलिंग प्रणाली को केवल तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म तक सीमित न रख कर, उपयोगकर्ता अनुभव, डेटा सुरक्षा, वर्कफ़्लो अनुकूलन और न्यायिक कार्यप्रणाली के साथ एकीकृत व्यवहारिक मॉडल तैयार किया जा रहा है। इस संदर्भ में, न्यायिक अधिकारियों, वकीलों, सॉफ़्टवेयर डेवलपर्स और नीति निर्माताओं को एकत्रित कर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहाँ नई प्रणाली के कार्य‑प्रणाली, उपयोगकर्ता‑इंटरफ़ेस और डेटा‑प्राइवेसी मानकों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए प्रमुख बिंदुओं में ई‑फाइलिंग पोर्टल का क्लाउड‑आधारित माइग्रेशन, मोबाइल‑फ़्रेंडली इंटरफ़ेस, स्वचालित केस‑ट्रैकिंग और एआई‑सहायता प्राप्त दस्तावेज़ वर्गीकरण शामिल थे। साथ ही, न्यायिक कर्मचारियों के प्रशिक्षण मॉड्यूल, बार एसोसिएशन के सहयोग से वकीलों के लिए प्रमाणन कार्यक्रम और छोटे शहरों के न्यायालयों में बुनियादी बुनियादी ढाँचा स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने बताया कि नई प्रणाली से केस प्रबंधन में समय की बचत, फाइलिंग त्रुटियों में कमी और पक्षकारों के बीच संवाद में सुधार की उम्मीद है।
कार्यशाला के समापन में ई‑कोर्ट मिशन मोड के प्रमुख अधिकारियों ने कहा कि “ई‑फाइलिंग 3.0” को अगले चरण में राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा, जिससे सभी स्तरों के न्यायालयों में समान डिजिटल अनुभव सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि तकनीकी चुनौतियों को दूर करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग, फीडबैक लूप और अद्यतन सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे, ताकि न्यायिक प्रणाली का डिजिटल परिवर्तन सतत और भरोसेमंद रहे।