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कृषि मजदूरों की सेहत को लेकर नई शोध पहल, धूल और कीटनाशकों के जोखिम पर मांगे गए प्रस्ताव
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कृषि मजदूरों की सेहत को लेकर नई शोध पहल, धूल और कीटनाशकों के जोखिम पर मांगे गए प्रस्ताव

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•4 नवंबर 2026 को 05:06 am बजे•0 व्यूज़•1 मिनट पढ़ें

ICMR ने कृषि और उससे जुड़े कार्यों में लगे मजदूरों के स्वास्थ्य जोखिमों पर शोध के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इसमें हार्वेस्टर से निकलने वाली धूल और कीटनाशकों के संपर्क से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को कई तरह के स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है। खेतों में लंबे समय तक काम करना, मशीनों से निकलने वाली धूल, कीटनाशकों का इस्तेमाल और सुरक्षा उपकरणों की कमी उनके स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कृषि मजदूरों और कृषि से जुड़े अन्य कामगारों के स्वास्थ्य पर शोध प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

एक प्रस्ताव में कंबाइन हार्वेस्टर से निकलने वाली धूल के संपर्क और उससे होने वाली श्वसन संबंधी समस्याओं का अध्ययन करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा कृषि से जुड़े कामों में जैविक जोखिम और कीटनाशकों के संपर्क से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों को समझने के लिए भी शोध प्रस्ताव मांगे गए हैं।

इस शोध का उद्देश्य यह पता लगाना है कि खेतों में काम करने वाले लोगों को किन परिस्थितियों में सबसे ज्यादा स्वास्थ्य जोखिम होता है और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कौन-से उपाय प्रभावी हो सकते हैं।

यदि ऐसे शोध के आधार पर बेहतर सुरक्षा उपाय विकसित किए जाते हैं, तो कृषि मजदूरों में सांस संबंधी समस्याओं और अन्य व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
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