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                 चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 319 पद खत्म:डायरेक्टर-रजिस्ट्रार की कुर्सियां लैप्स, नियमित भर्ती नहीं होने का खामियाजा, स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव
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चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 319 पद खत्म:डायरेक्टर-रजिस्ट्रार की कुर्सियां लैप्स, नियमित भर्ती नहीं होने का खामियाजा, स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव

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•5 नवंबर 2026 को 05:34 am बजे•0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर अधिकारियों को लाने और नियमित भर्ती की अनदेखी का खामियाजा चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग को भुगतना पड़ रहा है। विभाग के 319 पद समाप्त (लैप्स) हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारियों के पदों के साथ जीएमसीएच-32 के डायरेक्टर और रजिस्ट्रा

दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर अधिकारियों को लाने और नियमित भर्ती की अनदेखी का खामियाजा चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग को भुगतना पड़ रहा है। विभाग के 319 पद समाप्त (लैप्स) हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारियों के पदों के साथ जीएमसीएच-32 के डायरेक्टर और रजिस्ट्रार जैसे अहम प्रशासनिक पद भी शामिल हैं। करीब 15 से 20 साल तक इन पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं होने से दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों का प्रशासनिक और चिकित्सा ढांचा प्रभावित हुआ है। अब इन पदों को दोबारा बहाल कराने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। डायरेक्टर और रजिस्ट्रार के पद खत्म जीएमसीएच-32 में कुल 129 पद लैप्स हो चुके हैं। इनमें डायरेक्टर और रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों के अलावा फैकल्टी और प्रोफेसर स्तर के 34 पद शामिल हैं। वहीं, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के 93 पद समाप्त हो चुके हैं। नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर आए डॉक्टरों को विभाग प्रमुख और स्टोर इंचार्ज जैसे महत्वपूर्ण प्रभार सौंपे जा रहे हैं। अस्पताल के अंदर महत्वपूर्ण पदों और प्रभारों को लेकर लंबे समय से जोड़-तोड़ होने की भी चर्चा है। नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद खत्म जीएमएसएच-16 में भी नियमित भर्ती नहीं होने के कारण 190 पद लैप्स हो चुके हैं। इनमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 और डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ व मंत्रालयिक वर्ग के 131 पद शामिल हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि चहेते अधिकारियों और कर्मचारियों को डेपुटेशन पर लाने के चक्कर में नियमित भर्ती की फाइलें लंबित रखी गईं। इसका असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ा है। 3 साल खाली रहने पर पद समाप्त सरकारी नियमों के मुताबिक, कोई पद लगातार तीन साल तक खाली रहने पर डीम्ड अबॉलिश्ड यानी समाप्त माना जाता है। इसके पीछे तर्क यह है कि यदि बिना नियमित नियुक्ति के तीन साल तक कामकाज चलता रहा तो माना जाता है कि उस पद की जरूरत नहीं है। इसी नियम के चलते दोनों अस्पतालों के कुल 319 पद समाप्त हो गए। भर्ती नहीं होने के 3 बड़े कारणण……. सिफारिशों का अभाव: डेपुटेशन पर रिक्त पद भरने के लिए पंजाब और हरियाणा से यूटी प्रशासन को समय पर चिकित्सा अधिकारियों की सिफारिशें नहीं मिलीं। ओबीसी नीति का पेंच: चंडीगढ़ प्रशासन की ओबीसी श्रेणी नीति के कारण यूपीएससी इस वर्ग के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। आरआर में संशोधन लंबित: मार्च 2023 से केंद्रीय वेतनमान लागू होने के बाद भर्ती एवं सेवा नियमों (आरआर) में जरूरी बदलाव लंबे समय तक अटके रहे। स्वास्थ्य मंत्रालय के फैसले का इंतजार जीएमएसएच-16 के समाप्त हुए 190 पदों को दोबारा बहाल करने के प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। इसमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 और पैरामेडिकल व मंत्रालयिक वर्ग के 131 पद शामिल हैं। अब सभी समाप्त पदों को दोबारा जीवित करने के लिए मामला स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही इन पदों को बहाल करने और नियमित भर्ती का रास्ता साफ होगा।
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