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** सीएसआईआर और दक्षिण-आरआईएस ने विकासशील देशों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर समझौता किया
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** सीएसआईआर और दक्षिण-आरआईएस ने विकासशील देशों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर समझौता किया

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•4 नवंबर 2026 को 11:06 am बजे•0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

** भारत के प्रमुख विज्ञान संस्थान सीएसआईआर और दक्षिण-आरआईएस ने मिलकर विकासशील देशों में अनुसंधान क्षमता, तकनीकी हस्तांतरण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए एक व्यापक सहयोगी ढांचा तैयार किया है।

**
भारत के प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान, काउंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) और दक्षिण-आरआईएस (दक्षिणी क्षेत्रीय नवाचार प्रणाली) ने विकासशील देशों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष तकनीकी प्रशिक्षण, संयुक्त शोध परियोजनाएँ, बौद्धिक संपदा साझा करना और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम को विकसित करने हेतु संसाधन एवं विशेषज्ञता का आदान‑प्रदान करेंगे। विशेष रूप से, एग्रीटेक, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी, जहाँ इन देशों को तत्काल समाधान की आवश्यकता है।

सीएसआईआर ने अपने विस्तृत प्रयोगशालाओं और उद्योग‑अकादमी सहयोग मॉडल को दक्षिण-आरआईएस के क्षेत्रीय नेटवर्क के साथ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है, जिससे स्थानीय वैज्ञानिकों को उन्नत उपकरण और प्रशिक्षण तक पहुँच मिल सके। दक्षिण-आरआईएस, जो कई दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देशों के नवाचार संस्थानों को जोड़ता है, इस पहल को अपनी मौजूदा क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने का अवसर मानता है। दोनों संस्थान संयुक्त फंडिंग कार्यक्रम, छात्रवृत्ति योजना और वार्षिक विज्ञान मेले के माध्यम से ज्ञान का आदान‑प्रदान करेंगे, जिससे युवा शोधकर्ताओं को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक मंच मिल सके।

इस सहयोग से अपेक्षा है कि विकासशील देशों में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, साथ ही स्थानीय उद्यमों को तकनीकी सुदृढ़ता और बाजार पहुँच प्राप्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग मॉडल से न केवल नवाचार की गति तेज होगी, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। भविष्य में इस समझौते को विस्तार देते हुए, अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी इस पहल में शामिल करने की संभावना पर विचार किया जा रहा
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