** CSIR‑राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR‑NSP) ने पारंपरिक ज्ञान के संचार एवं प्रसार पर तीसरा संस्करण (CDTK‑2026) आयोजित किया
Naitik Chakravarti Times
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** CSIR‑NSP ने वैज्ञानिक और सामाजिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच प्रदान किया, जहाँ पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण और आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकरण पर चर्चा हुई।
** CSIR‑राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR‑NSP) ने इस वर्ष पारंपरिक ज्ञान के संचार एवं प्रसार (CDTK) के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन में विज्ञान संचार, नीतिनिर्माण, सामाजिक विज्ञान और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक शोध एवं सार्वजनिक नीति में प्रभावी ढंग से सम्मिलित करने की दिशा में एक व्यापक संवाद स्थापित हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों के माध्यम से आयुर्वेदिक औषधियों, जैव विविधता, कृषि प्रथाओं और सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़ी प्राचीन तकनीकों पर चर्चा की गई, साथ ही इन ज्ञानों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और खुली पहुँच वाले डेटाबेस में संरक्षित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदुओं में पारंपरिक ज्ञान के अधिकारों की सुरक्षा, बौद्धिक संपदा के प्रश्न, और स्थानीय समुदायों के लाभ के लिए उचित लाभ‑साझाकरण मॉडल को सुदृढ़ करना शामिल था। विशेषज्ञों ने बताया कि विज्ञान संचार के आधुनिक उपकरण—जैसे मल्टीमीडिया सामग्री, मोबाइल एप्लिकेशन और इंटरैक्टिव वेब पोर्टल—के प्रयोग से पारंपरिक ज्ञान को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाया जा सकता है, जिससे न केवल सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जा सकेगा बल्कि सतत विकास के लक्ष्यों में भी योगदान मिलेगा।
अंत में, CSIR‑NSP ने इस मंच को निरंतर जारी रखने और अगले संस्करण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की योजना की घोषणा की। यह पहल न केवल भारत में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को सुदृढ़ करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक नीति निर्माण में विविधता और नवाचार को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।