भारत की शिक्षा नीति 2025: डिजिटल परिवर्तन और चुनौतियाँ
Naitik Chakravarti Times
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भारत की नवीनतम शिक्षा नीति 2025 ने डिजिटल साक्षरता और प्रोजेक्ट‑आधारित शिक्षण को प्रमुख बनाया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच बढ़ाने के लिए नई पहलें शुरू की गई हैं।
भारत में शिक्षा को राष्ट्रीय विकास की आधारशिला माना जाता है। वर्तमान में लगभग 52.8 करोड़ छात्र प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर पंजीकृत हैं। सरकार ने 2024 में शिक्षा नीति 2025 के तहत पाठ्यक्रम में डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास को प्रमुख स्थान दिया है। इस नीति का उद्देश्य 2027 तक 100 प्रतिशत प्राथमिक शिक्षा और 80 प्रतिशत माध्यमिक शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। साथ ही, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए नई पहलें शुरू की गई हैं। सभी छात्रों के लिए समान अवसर और समग्र विकास पर जोर दिया गया है।
साक्षरता दर 74.4 प्रतिशत पर स्थिर है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 68 प्रतिशत तक गिरती है। 2023 के राष्ट्रीय शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, 18.5 करोड़ छात्र डिजिटल प्लेटफॉर्म से कक्षाएं ले रहे हैं, जो कुल पंजीकृत छात्रों का लगभग 35 प्रतिशत है। इसके अलावा, 12 प्रतिशत शिक्षकों ने डिजिटल टूल्स का प्रयोग करने की क्षमता हासिल की है।
नई शिक्षा नीति ने पाठ्यक्रम में प्रोजेक्ट‑आधारित शिक्षण को शामिल किया है। इसके तहत छात्रों को वास्तविक दुनिया के समस्याओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, स्कूलों में हर वर्ष कम से कम 20 घंटे व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों के रोजगार योग्यता में वृद्धि होगी। नीति के अनुसार, शिक्षकों के लिए वार्षिक प्रशिक्षण को 12 घंटे से बढ़ाकर 18 घंटे किया जाएगा।
फिर भी, ग्रामीण इलाकों में डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2024 में केवल 58 प्रतिशत स्कूलों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध है। इसके अलावा, शिक्षकों के बीच डिजिटल साक्षरता का स्तर अभी भी 48 प्रतिशत है, जिससे कक्षाओं में नई तकनीक का प्रभावी उपयोग सीमित रहता है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने 2025 तक 30,000 अतिरिक्त इंटरनेट एक्सेस पॉइंट स्थापित करने की योजना बनाई है।
आगे के दशक में भारत का लक्ष्य शिक्षा क्षेत्र में 90 प्रतिशत डिजिटल कवरेज प्राप्त करना है। इसके लिए सरकार ने ‘डिजिटल स्कूल्स’ नामक पहल शुरू की है, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम और ई‑लर्निंग प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, छात्र ऋण योजनाओं में सुधार कर उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास जारी रहेगा। यदि इन योजनाओं को समय पर लागू किया जाता है, तो 2030 तक भारत को विश्व में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की संभावना बढ़ेगी।
इन प्रयासों के समुचित कार्यान्वयन से भारत में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच में उल्लेखनीय सुधार संभव है।