खनन मंत्रियों के चौथे सम्मेलन में प्रमुख पहल और केंद्र‑राज्य समन्वय को मिला नया बढ़ावा
Naitik Chakravarti Times
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खनन मंत्रियों के चौथे सम्मेलन के पहले दिन, कई नई पहलें और महत्वपूर्ण विचार‑विमर्श सामने आए, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को नया आयाम मिला।
खनन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों ने इस वर्ष खनन मंत्रियों के चौथे सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कई नई पहल और नीति दिशानिर्देशों पर चर्चा की। सम्मेलन में 12 राज्यों के खनन एवं ऊर्जा मंत्रियों के साथ केंद्रीय खनन मंत्रालय के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। सत्र के दौरान, खनन सुरक्षा, डिजिटल ट्रैकिंग, और पर्यावरणीय मानकों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। केंद्रीय सरकार ने एक संयुक्त कार्य बल की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जो राज्य-स्तरीय खनन परियोजनाओं के पर्यवेक्षण और अनुपालन को सुनिश्चित करेगा।
सम्मेलन के दौरान, खनन मंत्रालय ने 'स्मार्ट माइनिंग' पहल के तहत डिजिटल रजिस्ट्री और रियल‑टाइम डेटा साझा करने के लिए एक नया प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया। इस प्लेटफ़ॉर्म से खनन गतिविधियों की पारदर्शिता बढ़ाने और पर्यावरणीय प्रभावों का त्वरित आकलन संभव होगा। इसके अलावा, सरकार ने खनन सुरक्षा के लिए नवीनतम तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु एक पायलट प्रोग्राम शुरू किया, जिसमें ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी शामिल है।
राज्य मंत्रियों ने भी अपनी-अपनी योजनाओं को प्रस्तुत करते हुए बताया कि वे राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप स्थानीय स्तर पर खनन परियोजनाओं को कैसे लागू कर रहे हैं। विशेष रूप से, वे जल प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार सृजन पर जोर देते हुए, समग्र विकास मॉडल को अपनाने का आग्रह कर रहे हैं। सम्मेलन का यह पहला दिन केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में सतत विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक रहा।