हिमाचल के धर्मशाला में ई‑गवर्नेंस सुधारों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
Naitik Chakravarti Times
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हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आज से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें ई‑गवर्नेंस नीतियों के सुधार पर चर्चा के लिये केंद्रीय, राज्य तथा शैक्षणिक तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि एकत्र हुए।
धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश – आज सुबह धर्मशाला के केंद्रीय सरकारी भवन में “ई‑गवर्नेंस सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन” का उद्घाटन हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी, राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस विभाग के प्रमुख, और शैक्षणिक व उद्योग जगत के 30 से अधिक प्रतिनिधि शामिल थे। सम्मेलन का उद्देश्य डिजिटल शासन के वर्तमान ढाँचे का पुनर्मूल्यांकन करना और ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए नयी पहल पर सहमति बनाना है।
सत्र के दौरान, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री ने बताया कि “डिजिटल इंडिया” के तहत 2025 तक सभी सरकारी कार्यों का 70 प्रतिशत ऑनलाइन हो जाना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए डेटा सुरक्षा, नागरिकों की डिजिटल साक्षरता और बुनियादी ढाँचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। राज्य के डिजिटल गवर्नेंस निदेशक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश ने 2024 में ‘ई‑गवर्नेंस पोर्टल’ के माध्यम से 1.5 करोड़ नागरिकों तक पहुँच बनाई है, परंतु ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी और डिजिटल कौशल की कमी अभी भी एक चुनौती है।
सम्मेलन के दौरान कई कार्यशालाएँ और पैनल चर्चाएँ भी आयोजित की गईं, जिनमें ‘स्मार्ट सिटी’ मॉडल, ‘इलेक्ट्रॉनिक पहचान’ (ई‑आईडी) के विस्तार, और ‘क्लाउड‑आधारित सार्वजनिक सेवाएँ’ पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने यह सहमति जताई कि सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिये ओपन डेटा पहल को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। दो दिवसीय कार्यक्रम के अंत में एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे अगले वर्ष की शुरुआत में लागू किया जायेगा। यह सम्मेलन हिमाचल प्रदेश के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ सरकार ने डिजिटल परिवर्तन को अपनी विकास रणनीति के प्रमुख स्तम्भ के रूप में स्थापित किया है।