** राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं नशा नियंत्रण एजेंसी (डीएएचडी) ने अपना नवीनतम विशेष अभियान 6.0 समाप्त कर लिया, जिससे नशा‑मुक्त समाज की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज हुई।
** राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं नशा नियंत्रण एजेंसी (डीएएचडी) ने अपने विशेष अभियान 6.0 को सफलतापूर्वक समाप्त किया, जिससे देश भर में नशा‑मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिये नई रणनीतियों का परिचय हुआ। इस चरण में पिछले अभियानों की सीख को सम्मिलित कर, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के तीन स्तंभों पर विशेष जोर दिया गया। अभियान के तहत शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और ग्रामीण समुदायों में जागरूकता कार्यशालाओं, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों और डिजिटल परामर्श सेवाओं का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया गया। सहयोगी राज्य सरकारों और गैर‑सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी के माध्यम से, लक्षित क्षेत्रों में नशा‑उपभोग की प्रवृत्ति को कम करने हेतु साक्ष्य‑आधारित हस्तक्षेप लागू किए गए।
परिणामस्वरूप, कई राज्यों में नशा‑संबंधी मामलों में गिरावट और पुनर्वास केंद्रों में दाखिला लेने वाले रोगियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। विशेष रूप से युवा वर्ग में नशा के दुष्प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी, जिससे स्कूल और कॉलेजों में नशा‑रोकथाम पाठ्यक्रम को अनिवार्य रूप से अपनाया गया। अभियान के अंत में जारी किए गए प्रारम्भिक रिपोर्ट में बताया गया कि शैक्षिक कार्यशालाओं में भाग लेने वाले 70 % से अधिक लोगों ने नशा‑उपभोग के जोखिम को समझा और स्वस्थ विकल्प अपनाने का इरादा व्यक्त किया।
डीएएचडी ने इस सफलता को भविष्य के अभियानों के लिए एक मॉडल मानते हुए, अगले चरण में डिजिटल हेल्थ प्लेटफ़ॉर्म को और सुदृढ़ करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच बढ़ाने की योजना घोषित की है। इस दिशा में, एजेंसी ने नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों और समुदाय के बीच निरंतर संवाद को जारी रखने का संकल्प लिया है, ताकि नशा‑मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।