स्वास्थ्य में नई चुनौतियाँ: रोगों के बढ़ते आँकड़े और सरकार की प्रतिक्रिया
Naitik Chakravarti Times
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भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और सरकारी पहलों का विस्तृत विश्लेषण। श्वसन रोग, मधुमेह, कैंसर के बढ़ते आँकड़े और टीकाकरण कवरेज पर विशेष प्रकाश।
भारत की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले पाँच वर्षों में श्वसन रोग, मधुमेह और कैंसर के मामलों में क्रमशः 12%, 9% और 7% की वृद्धि दर्ज हुई है। इस बीच, ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज अभी भी 70% से नीचे है, जबकि शहरी इलाकों में 90% से अधिक है। सरकार ने 2025 में स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे के लिए 5,00,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया, परंतु संसाधनों का वितरण अभी भी असमान है। इस लेख में हम आँकड़ों, नीतिगत बदलावों और विशेषज्ञों के दृष्टिकोण का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी 30% से अधिक है, जिसके कारण रोगियों को अक्सर शहरों की सुविधा तक पहुँचने के लिए 5-10 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यहाँ की चिकित्सा उपकरणों की कमी और रखरखाव की अनियमितता से इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
टीकाकरण कार्यक्रमों में अभी भी 20% की कमी है, खासकर एचपीवी और इन्फ्लूएंजा के लिए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2024 में 1 करोड़ बच्चों को फ्लू वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा गया, परंतु क्षेत्रीय असमानता ने इस लक्ष्य को कमजोर किया।
केंद्र सरकार ने 'स्वास्थ्य प्रथम' योजना के तहत 2026 तक 1500 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुसज्जित करने का वादा किया है, साथ ही डिजिटल स्वास्थ्य पोर्टल के माध्यम से रोगी रिकॉर्ड को केंद्रीकृत करने की योजना है।
डॉ. रश्मि पाटिल, एचआईवी अनुसंधान केंद्र की प्रमुख, का कहना है कि 'रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है, अन्यथा टीकाकरण दरों में सुधार संभव नहीं।'
आगामी वर्ष में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रचलित डेटा एनालिटिक्स के आधार पर लक्षित अभियान चलाने की योजना है, जिससे रोग प्रबंधन में 15% सुधार की उम्मीद है।
मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, परंतु 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 1 में से 4 लोगों को किसी न किसी मानसिक रोग का सामना करना पड़ता है। सरकार ने 2025 में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 200 नई क्लीनिक खोलने की योजना बनाई है, जिससे पहुँच में सुधार होगा।
बीमा कवरेज अभी भी 30% से कम है, विशेषकर निम्न आय वर्ग में। 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना' के तहत 2024 में 5 करोड़ परिवारों को कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया, परंतु पंजीकरण प्रक्रियाएँ जटिल होने से लाभार्थियों की संख्या कम रही।
इस प्रकार, स्वास्थ्य क्षेत्र में संतुलित विकास के लिए सरकारी नीतियों और समाजिक जागरूकता दोनों का समन्वय अनिवार्य है।