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सौर ऊर्जा निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी, भारत का सोलर आयात बिल 95 प्रतिशत तक घट सकता है; 2047 तक 89 अरब डॉलर निवेश का अनुमान
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सौर ऊर्जा निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी, भारत का सोलर आयात बिल 95 प्रतिशत तक घट सकता है; 2047 तक 89 अरब डॉलर निवेश का अनुमान

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•4 नवंबर 2026 को 04:02 am बजे•0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

भारत सौर ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र में लगभग 89 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। इससे सोलर सेल और पैनल के आयात पर निर्भरता में 95 प्रतिशत से अधिक की कमी आने की संभावना जताई गई है।

नई दिल्ली: भारत में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ सौर उपकरणों के घरेलू निर्माण को लेकर नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। देश का उद्देश्य सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ सोलर पैनल, सेल और अन्य जरूरी उपकरणों के निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनना है।

उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2047 तक भारतीय सौर निर्माण क्षेत्र में लगभग 89 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हो सकता है। यदि घरेलू उत्पादन क्षमता योजनाओं के अनुसार बढ़ती है तो सौर उपकरणों के आयात बिल में 95 प्रतिशत से अधिक की कमी आने की संभावना है।

भारत में सौर ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने से लेकर बड़े सौर ऊर्जा पार्कों तक अनेक परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

सौर ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू निर्माण बढ़ने से देश को कई लाभ मिल सकते हैं। सबसे पहला लाभ आयात पर निर्भरता कम होने का होगा। इसके अलावा स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और तकनीकी क्षेत्र में नए रोजगार पैदा हो सकते हैं।

सोलर सेल निर्माण के लिए आधुनिक मशीनरी, उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल, तकनीकी अनुसंधान और पर्याप्त निवेश की जरूरत होती है। इसलिए घरेलू उद्योग को मजबूत करने के लिए सरकार और निजी कंपनियों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा।

भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोलर पैनलों की कीमत, उत्पादन लागत और तकनीकी गुणवत्ता के आधार पर कंपनियों को प्रतिस्पर्धा करनी होगी।

यदि घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ती है तो इससे सौर ऊर्जा परियोजनाओं की आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत हो सकती है। साथ ही भारत भविष्य में सौर उपकरणों का निर्यातक बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।

स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को देखते हुए यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण निवेश अवसर बन सकता है।
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