** वित्त मंत्रालय के नेतृत्व में गठित अंतर‑मंत्रालयी समूह ने हाल ही में कैबिनेट के समक्ष 1,100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के परिसंपत्ति मुद्रीकरण प्रस्तावों की सिफ़ारिश प्रस्तुत की। इन प्रस्तावों में मुख्यतः सरकारी स्वामित्व वाली अचल संपत्तियाँ, जमीनी हिस्से, तथा कुछ सार्वजनिक उपयोगिताओं की इक्विटी शामिल है। समूह ने बताया कि प्रस्तावित परिसंपत्तियों का मूल्यांकन बाज़ार आधारित मानदंडों के अनुसार किया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि सार्वजनिक हित को कोई क्षति न हो।
कैबिनेट ने इन सिफ़ारिशों को "वैकल्पिक तंत्र" के तहत अनुमोदित किया, जो पारंपरिक टेंडर और नीलामी प्रक्रियाओं से अलग है। इस तंत्र के अंतर्गत, परिसंपत्तियों का मूल्यांकन और बिक्री एक स्वतंत्र मूल्यांकन बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धात्मक बोली सुनिश्चित की जा सके। सरकार का दावा है कि यह प्रक्रिया न केवल राजस्व उत्पन्न करेगी बल्कि सार्वजनिक परिसंपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए एक नया मानक भी स्थापित करेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से सरकार को आने वाले वर्षों में राजकोषीय घाटा घटाने में मदद मिलेगी और निवेशकों को सरकारी परिसंपत्तियों में निवेश का नया मार्ग मिलेगा। साथ ही, यह पहल सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति के उपयोग को अधिक उत्पादक बनाने के लिए एक सशक्त ढाँचा प्रदान करती है, जिससे दीर्घकालीन आर्थिक स्थिरता में योगदान की उम्मीद है।