वरिष्ठ नेता जी राम जी ने “विकसित भारत” पहल की घोषणा की, जिसमें ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक योजना प्रस्तुत की गई है।
पर्याप्त संसाधनों के आवंटन और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी को आधार बनाकर, जी राम जी ने “विकसित भारत” योजना को भारत के ग्रामीण विकास की दिशा में एक नई मील का पत्थर बताया। इस पहल के तहत अगले पाँच वर्षों में सड़कों, जल आपूर्ति, स्वच्छता और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को तेज गति से सुधारने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के स्तर को उन्नत करने हेतु डिजिटल कक्षाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का आधुनिकीकरण, टेली‑मेडिसिन सेवाओं का विस्तार और मातृ‑शिशु स्वास्थ्य के लिए विशेष पहलें इस योजना के प्रमुख स्तंभ हैं।
विकास के इस व्यापक ढाँचे को राष्ट्रीय बजट के एक उल्लेखनीय हिस्से के साथ वित्तपोषित किया जाएगा, जिसका अधिकांश भाग केंद्र एवं राज्य सरकारों के सहयोग से जुटाया गया है। योजना की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र निकाय स्थापित किया गया है, जो समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय समुदायों को निर्णय‑निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए तो “विकसित भारत” योजना ग्रामीण असमानताओं को कम करने और सतत आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने में कारगर सिद्ध हो सकती है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने योजना की व्यापकता की सराहना करते हुए, कार्यान्वयन में पारदर्शिता और लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने की माँग की है। इस पहल का सफल कार्यान्वयन भारत को विश्व स्तर पर एक समावेशी विकास मॉडल के रूप में स्थापित करने की संभावनाएँ रखता है।