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अपशिष्ट में नए उपयोग की तलाश
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अपशिष्ट में नए उपयोग की तलाश

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•1 अक्टूबर 2026 को 10:24 am बजे•3 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

देशभर में अपशिष्ट प्रबंधन को नयी दिशा देने के प्रयास तेज़ हो रहे हैं, जहाँ वैज्ञानिक, उद्यमी और नीति-निर्माता अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने के लिए नवीनतम तकनीकों और मॉडल पर काम कर रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में कचरे के बढ़ते प्रवाह ने पर्यावरणीय दबाव के साथ-साथ आर्थिक अवसरों के नए आयाम खोले हैं। सरकार और निजी क्षेत्र ने मिलकर “सर्कुलर इकॉनमी” के सिद्धांतों को अपनाते हुए अपशिष्ट को नयी उपयोगिताओं में बदलने के लिए कई पहल शुरू की हैं। इनमें प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, कृषि अवशेष और खाद्य अपशिष्ट को ऊर्जा, निर्माण सामग्री और रासायनिक कच्चे माल में परिवर्तित करने के लिए उन्नत रीसाइक्लिंग संयंत्रों का निर्माण प्रमुख है।

विज्ञानियों ने बायो-टेक्नोलॉजी और नैनो-इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रगति करके प्लास्टिक के माइक्रोबियल विघटन और पॉलिमर के रीसाइक्लिंग के लिए नई विधियाँ विकसित की हैं। इसी के साथ, स्टार्ट‑अप्स ने खाद्य अपशिष्ट से बायोगैस उत्पादन और कृषि अवशेष से बायो-फ्यूल बनाने के प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया है। सरकार ने इन नवाचारों को बढ़ावा देने हेतु कर‑रियायतें, अनुसंधान अनुदान और सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मॉडल स्थापित किये हैं।

साथ ही, स्थानीय स्वशासनिक निकायों ने “कचरा वर्गीकरण” और “संसाधन पुनर्प्राप्ति” के लिए समुदाय‑आधारित कार्यक्रम शुरू किये हैं, जिनमें नागरिकों को कचरे को अलग‑अलग करके जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह न केवल पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देता है। अपशिष्ट को संसाधन में बदलने के इस व्यापक प्रयास से भारत को वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी भूमिका निभाने की उम्मीद है।
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