** आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी से संबंधित विधायी घटनाक्रमों पर स्पष्टीकरण
Naitik Chakravarti Times
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** वित्त मंत्री ने संसद में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में आईडीबीआई में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी, उसके पुनर्संरचनात्मक कदम और हालिया विधायी प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी दी।
** वित्त मंत्री ने आज संसद में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में कहा कि सरकार ने आईडीबीआई (इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ़ इंडिया) में अपनी हिस्सेदारी को लेकर कई विधायी पहलें उठाई हैं, जिनका उद्देश्य बैंक की वित्तीय स्थिरता और सार्वजनिक हित को सुदृढ़ करना है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आईडीबीआई को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से निजी क्षेत्र के मिश्रित स्वरूप में बदलने के लिए कई चरणबद्ध कदम उठाए गए, जिसमें 2005 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल अपनाया गया और 2019 में बैंकों के पुनर्संरचनात्मक योजना के तहत शेयरधारक संरचना में बदलाव किया गया। वर्तमान में केंद्र सरकार के पास बैंक में 20.5% का शेयरholding है, जो रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के साथ-साथ निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
विधायी घटनाक्रमों के संदर्भ में, वित्त मंत्रालय ने हाल ही में प्रस्तावित विधेयक का मसौदा पेश किया है, जिसमें आईडीबीआई के शेयरधारकों के अधिकारों, पूँजी बढ़ाने की प्रक्रियाओं और संभावित शेयर बिक्री की शर्तों को स्पष्ट किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य बैंक की पूँजी संरचना को अधिक लचीलापन प्रदान करना और भविष्य में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त पूँजी जुटाने के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढाँचा स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त, संसद की वित्तीय मामलों की समिति ने भी इस विषय पर एक विशेष रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें कहा गया है कि सरकार को अपने हिस्से को धीरे-धीरे घटाते हुए निजी निवेशकों के साथ साझेदारी को मजबूत करना चाहिए, ताकि बैंक की प्रतिस्पर्धात्मकता और वित्तीय स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो सके। वित्त मंत्री ने इस रिपोर्ट को मान्यता देते हुए कहा कि सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय में कार्य करेगी और आवश्यकतानुसार विधायी प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।