** कार्यस्थल पर असुरक्षित परिस्थितियों से सुरक्षा और सम्मान तक का सफर: एनएएमएएसटीई योजना के तहत सफलता की कहानी
Naitik Chakravarti Times
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** सरकारी एनएएमएएसटीई योजना ने एक मध्य‑पश्चिमी औद्योगिक इकाई में सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ किया, जिससे दुर्घटनाओं में घटाव और कर्मचारियों के सम्मान में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
** पिछले कुछ वर्षों में भारत के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यस्थल सुरक्षा और कर्मचारियों के सम्मान को लेकर कई चिंताएँ उठी थीं। विशेषकर छोटे और मध्यम उद्यमों में सुरक्षा उपकरणों की कमी, अपर्याप्त प्रशिक्षण और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याएँ आम थीं। इन चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा एवं सम्मान योजना (एनएएमएएसटीई) लॉन्च की, जिसका उद्देश्य कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाना, कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देना और एक सम्मानजनक कार्यपरिवेश स्थापित करना है। इस योजना के तहत विभिन्न उद्योगों को तकनीकी सहायता, वित्तीय अनुदान और विशेषज्ञ परामर्श प्रदान किया जाता है।
एक मध्य‑पश्चिमी राज्य में स्थित धातु प्रसंस्करण इकाई ने इस योजना का सक्रिय रूप से उपयोग किया। कंपनी ने पहले सुरक्षा ऑडिट करवाया, जिसके बाद सुरक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण, आपातकालीन निकासों की पुनर्स्थापना और नियमित सुरक्षा ड्रिल्स का आयोजन किया गया। साथ ही, एनएएमएएसटीई के तहत प्रदान किए गए लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण ने महिलाओं के प्रति व्यवहार में सुधार लाया, जिससे कार्यस्थल पर उत्पीड़न के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई। परिणामस्वरूप, पिछले दो वर्षों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में लगभग आधा गिरावट दर्ज की गई और कर्मचारी संतुष्टि सर्वेक्षण में सम्मान और सुरक्षा के मानकों में उल्लेखनीय उछाल देखा गया।
एनएएमएएसटीई योजना की यह सफलता न केवल एक कंपनी की कहानी है, बल्कि यह दर्शाती है कि सरकारी पहल और उद्योग की सक्रिय भागीदारी मिलकर कार्यस्थल को सुरक्षित और सम्मानजनक बना सकती है। नीति निर्माताओं ने इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में दोहराने की संभावना पर चर्चा शुरू कर दी है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जा सके।