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भारत ने बुसान में जहाज़ निर्माण आपूर्ति श्रृंखला से लेकर जहाज़ पुनर्चक्रण तक अपने समुद्री सहयोग का विस्तार किया
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भारत ने बुसान में जहाज़ निर्माण आपूर्ति श्रृंखला से लेकर जहाज़ पुनर्चक्रण तक अपने समुद्री सहयोग का विस्तार किया

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•28 अक्टूबर 2026 को 05:14 am बजे•0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

भारत और दक्षिण कोरिया ने बुसान में हुए वार्ता में जहाज़ निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और जहाज़ पुनर्चक्रण के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने का समझौता किया, जिससे दोनों देशों की समुद्री उद्योगों में नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी।

बुसान में आयोजित द्विपक्षीय समुद्री सहयोग मंच में भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने मौजूदा साझेदारी को विस्तारित करने के लिए कई रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत भारतीय नौसेना और कोरियाई शिपयार्ड्स के बीच जहाज़ निर्माण के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्टील, एल्युमिनियम और उच्च तकनीकी घटकों का स्थायी प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। दोनों पक्षों ने आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और लागत दक्षता बढ़ाने हेतु संयुक्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित करने की भी योजना बनाई है, जिससे भविष्य में अधिक टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले युद्धपोत तथा वाणिज्यिक जहाज़ों का निर्माण संभव हो सकेगा।

समझौते के दूसरे भाग में जहाज़ पुनर्चक्रण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की पहल शामिल है। दोनों देशों ने समुद्री कचरे के प्रबंधन और पुराने जहाज़ों के पर्यावरणीय पुनर्चक्रण के लिए साझा तकनीक विकसित करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया है। यह पहल न केवल समुद्री प्रदूषण को कम करने में सहायक होगी, बल्कि पुनर्चक्रण से प्राप्त सामग्री को नई जहाज़ निर्माण परियोजनाओं में पुनः उपयोग करने की संभावना भी पैदा करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से भारत की समुद्री सुरक्षा और उद्योगिक क्षमता को नई दिशा मिलेगी, जबकि दक्षिण कोरिया को एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में अपने शिपबिल्डिंग बाजार का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। दोनों राष्ट्रों के बीच इस तरह के व्यापक सहयोग से न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि समुद्री पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
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