अप्रैल–अगस्त 2026 में भारत के इस्पात क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि की प्रवृत्ति जारी
Naitik Chakravarti Times
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भारत के इस्पात उद्योग ने अप्रैल से अगस्त 2026 तक निरंतर वृद्धि दर्ज की, जिससे घरेलू मांग और निर्यात दोनों में सुधार दिखा।
अप्रैल–अगस्त 2026 के बीच भारत के इस्पात क्षेत्र ने लगातार सकारात्मक वृद्धि की प्रवृत्ति बनाए रखी, जैसा कि राष्ट्रीय उद्योग संघ (NIS) और केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के नवीनतम आँकड़ों से पता चलता है। इस अवधि में उत्पादन क्षमता में 3.8 % की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू उपभोग में 5.2 % का उछाल आया। निर्यात में भी 4.5 % की बढ़ोतरी के साथ, भारत ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति को मजबूत किया।
इस वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। प्रथम, बुनियादी ढाँचे के बड़े पैमाने पर निवेश, विशेषकर हाईवे, रेल और बंदरगाहों के विस्तार के कारण निर्माण एवं ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग तेज़ी से बढ़ी। द्वितीय, सरकार द्वारा जारी की गई ‘इंडियन स्टील स्ट्रैटेजी 2026’ ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कर रियायतें और सब्सिडी योजनाओं को लागू किया, जिससे कच्चे माल की लागत में कमी आई। तृतीय, वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता और चीनी एवं ऑस्ट्रेलियाई आपूर्तिकर्ताओं के साथ बेहतर व्यापारिक समझौते ने निर्यात के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा कीं।
हालाँकि, उद्योग को अभी भी कुछ चुनौतियों का सामना करना है। कच्चे माल की आपूर्ति में अवसाद, ऊर्जा लागत में उतार-चढ़ाव और पर्यावरणीय नियमों के सख्त होने से उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है। फिर भी, नीतिगत समर्थन और निरंतर निवेश के चलते, भारतीय इस्पात उद्योग ने न केवल घरेलू मांग को संतुष्ट किया बल्कि वैश्विक आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आगामी तिमाहियों में यह प्रवृत्ति जारी रहने की उम्मीद है, जिससे भारत को वैश्विक इस्पात बाजार में एक स्थायी और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।