** प्रधानमंत्री ने आसान और भरोसे पर आधारित कर प्रणाली के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिशों का स्वागत किया
Naitik Chakravarti Times
••0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
** प्रधानमंत्री ने जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित सरलीकृत एवं भरोसे‑आधारित कर ढाँचे को स्वीकार किया, कहा कि यह कदम करदाता‑उन्मुख सुधारों को तेज़ी से लागू कर आर्थिक विकास को सुदृढ़ करेगा।
** प्रधानमंत्री ने हाल ही में आयोजित एक राष्ट्रीय आर्थिक मंच में जीएसटी परिषद की नई सिफ़ारिशों का स्वागत किया, जिसमें कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसे‑आधारित बनाने के कई प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि करदाता‑उन्मुख नीतियों को अपनाना न केवल व्यवसायों की संचालन लागत को घटाएगा, बल्कि डिजिटल भुगतान एवं स्व-घोषणा प्रणाली को भी सुदृढ़ करेगा। परिषद की सिफ़ारिशों में प्रमुख रूप से एकल राष्ट्रीय कर दर का प्रस्ताव, छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रक्रिया का सरलीकरण, तथा डिजिटल पहचान (आधार) के माध्यम से करदाता सत्यापन को तेज़ करने के उपाय शामिल हैं। इन कदमों से कर अनुपालन में भरोसा बढ़ेगा और कर चोरी के जोखिम को कम किया जा सकेगा।
जीएसटी परिषद, जो केंद्र और राज्य सरकारों के वित्तीय मंत्रियों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से बनी है, ने पिछले कई वर्षों में कर दरों में विविधता और जटिल नियमों को लेकर आलोचनाओं का सामना किया था। इस बार की सिफ़ारिशें उन समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं, जिसमें दो‑तीन प्रमुख कर स्लैब को घटाकर एक व्यापक दर में परिवर्तित करना, तथा रिटर्न दाखिल करने की अवधि को साप्ताहिक से मासिक करने की योजना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये परिवर्तन छोटे व्यवसायों को लाभान्वित करेंगे, जिससे औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।
आर्थिक विश्लेषकों ने इस कदम को भारत की कर प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति बताया है। उन्होंने कहा कि भरोसे‑आधारित मॉडल अपनाने से कर प्रशासन की लागत घटेगी और राजस्व संग्रह में स्थिरता आएगी। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे इस सुधार को शीघ्रता से लागू करने में सहयोग दें, ताकि करदाता‑संत