** FCRA रजिस्ट्रेशन के बदले रिश्वत की मांग करने वाले दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया
Naitik Chakravarti Times
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** दो सरकारी अधिकारियों पर विदेशी योगदान पंजीकरण के दौरान रिश्वत माँगने का आरोप लगा, और उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
** विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में दो वरिष्ठ अधिकारीयों से रिश्वत की मांग करने का आरोप लगते ही स्थानीय पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। जांच के अनुसार, आरोपियों ने कई गैर‑सरकारी संगठनों (NGOs) को पंजीकरण की मंजूरी के बदले नकद भुगतान की पेशकश की थी। इस संबंध में प्राप्त शिकायतों के बाद, वित्त मंत्रालय के सहयोगी एजेंसी ने मामले की तुरंत जांच शुरू कर दी और संबंधित दस्तावेज़ एवं बैंक लेन‑देनों की जाँच के बाद कार्रवाई की।
FCRA, जो विदेशी फंडों के प्रवाह को नियंत्रित करता है, भारत में सामाजिक विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कार्यरत NGOs के लिए महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा है। पिछले कुछ वर्षों में इस अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियामक कदम उठाए जा रहे हैं, और कई बार अनधिकृत धन प्रवाह या पंजीकरण में अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में, अधिकारियों द्वारा रिश्वत की माँग का मामला न केवल कानून के उल्लंघन को दर्शाता है, बल्कि विदेशी योगदान के पारदर्शी उपयोग को भी खतरे में डालता है।
सरकार ने इस घटना पर कड़ी निंदा जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा और सिस्टम की सुदृढ़ता को प्राथमिकता दी जाएगी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार की भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों में आंतरिक नियंत्रण को और मजबूत किया जाएगा और FCRA पंजीकरण प्रक्रिया में नई निगरानी तंत्र लागू किए जाएंगे। नागरिक समाज और NGOs ने भी इस कदम की सराहना की, यह कहते हुए कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा और विदेशी फंडों के उपयोग में विश्वास को पुनर्स्थापित करेगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक प्रशिक्षण और सख्त निरीक्षण की योजना बनाई जा रही है।