भारत‑जापान ने संयुक्त ऋण तंत्र के लिए परिचालन नियमावली जारी की
Naitik Chakravarti Times
••0 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
भारत और जापान ने आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु संयुक्त ऋण तंत्र के संचालन के लिए विस्तृत नियमावली प्रकाशित की, जिससे दोनों देशों के बुनियादी ढाँचा और नवाचार परियोजनाओं में निवेश को तेज़ी मिलेगी।
भारत और जापान ने हाल ही में एक सामूहिक ऋण तंत्र (Joint Loan Facility) के संचालन के लिए विस्तृत परिचालन नियमावली जारी की, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और सतत विकास क्षेत्रों में वित्तीय सहयोग को व्यवस्थित रूप से बढ़ाना है। इस नियमावली में ऋण के पात्रता मानदंड, प्रोजेक्ट चयन प्रक्रिया, मूल्यांकन एवं जोखिम प्रबंधन, तथा पुनर्भुगतान शर्तें स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं। विशेष रूप से, परियोजनाओं को आर्थिक लाभ, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक समावेशिता के मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है, जिससे दोनों देशों के विकास लक्ष्यों के साथ तालमेल बना रहे। इसके अतिरिक्त, नियमावली में ऋण की मंजूरी के लिए द्विपक्षीय समन्वय समिति की भूमिका, निगरानी रिपोर्टिंग और पारदर्शिता उपायों का भी विवरण दिया गया है, जिससे निवेशकों और सार्वजनिक हितधारकों को भरोसा प्रदान किया जा सके।
यह कदम भारत‑जापान रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढाँचे में आता है, जिसमें रक्षा, विज्ञान‑प्रौद्योगिकी और व्यापारिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के कई समझौते शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में संयुक्त वित्तीय सहायता प्रदान की है, और इस नई नियमावली से उन सहयोगों को अधिक प्रणालीबद्ध और प्रभावी बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तंत्र न केवल बड़े पैमाने पर परियोजनाओं के तेज़ कार्यान्वयन में मदद करेगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को भी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि और जापान की निवेश रणनीति दोनों को लाभ होगा।
परिचालन नियमावली के प्रकाशन के बाद, दोनों देशों की वित्तीय संस्थाएँ और प्रासंगिक मंत्रालय जल्द ही विस्तृत कार्यशालाओं और परामर्श सत्रों का आयोजन करेंगे, ताकि संभावित उधारकर्ता और परियोजना प्रायोजक इस तंत्र के लाभों को समझ सकें और प्रभावी रूप से भाग ले सकें। इस पहल से आशा है कि भारत‑जापान के बीच आर्थिक बंधन और गहरे होंगे, और दोनों राष्ट्रों की सतत विकास की दिशा में प्रगति को गति मिलेगी।