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भारत में एसएमई के विकास पर नई सरकारी पहल: 2024 की प्रमुख उपलब्धियाँ
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भारत में एसएमई के विकास पर नई सरकारी पहल: 2024 की प्रमुख उपलब्धियाँ

Naitik Chakravarti TimesNaitik Chakravarti Times
•3 नवंबर 2026 को 08:59 am बजे•0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

भारत की छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) को 2024 में वित्तीय सहायता, तकनीकी ग्रांट और निर्यात समर्थन के माध्यम से आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए नई योजना का लाभ मिला। इस पहल ने रोजगार सृजन और निर्यात में उल्लेखनीय प्रगति को तेज किया।

भारत में छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) ने पिछले पाँच वर्षों में आर्थिक विकास में प्रमुख भूमिका निभाई है। 2023-2024 वित्तीय वर्ष में एसएमई sector ने 12.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिससे राष्ट्रीय उत्पादन में 8.3 प्रतिशत योगदान बढ़ा। सरकार ने 2024 के प्रथम तिमाही में 15,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता योजना लॉन्च की, जिसका उद्देश्य नवाचार, डिजिटल रूपांतरण और निर्यात क्षमता को सुदृढ़ करना है। इस पहल के तहत 2.5 लाख नई स्टार्टअप्स को अनुदान और ऋण सुविधाएँ प्रदान की गईं, जिससे रोजगार सृजन में सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद है। और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, विकास के नए अवसर।

वित्तीय सहायता योजना को 'उद्यम विकास निधि 2024' कहा गया है, जिसमें उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए मशीनरी सब्सिडी, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अपनाने के लिए तकनीकी ग्रांट और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाजार प्रवेश समर्थन शामिल हैं। योजना के तहत 2024 में 1.2 लाख छोटे उद्योगों को 5,000 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया, जबकि 3,500 करोड़ रुपये का सस्ता ऋण उपलब्ध कराया गया। इस पहल का लक्ष्य 2025 तक एसएमई की कुल आय को 10 प्रतिशत बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में उनकी स्थिति को सुदृढ़ करना है।

इन अवसरों के बावजूद, कई उद्यम अभी भी वित्तीय बाधाओं और तकनीकी अड़चनों का सामना कर रहे हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच सीमित है, जिससे ऋण प्राप्त करना कठिन हो जाता है। साथ ही, डिजिटल कौशल की कमी और पुरानी उत्पादन तकनीक प्रतिस्पर्धी बाजार में नुकसान पहुंचा रही है। सरकार ने 2024 के मध्य में 'डिजिटल साक्षरता मिशन' लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य 2026 तक 1.5 मिलियन कार्यकर्ताओं को आईटी प्रशिक्षण देना है, परन्तु इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता अभी मूल्यांकन के चरण में है।

रोजगार सृजन के आंकड़े इस नीति के सकारात्मक परिणाम दर्शाते हैं। 2024 की पहली छमाही में, एसएमई सेक्टर ने 4.2 लाख नई नौकरियां पैदा कीं, जिसमें 60 प्रतिशत महिलाएं और 35 प्रतिशत युवा शामिल हैं। निर्यात में भी सुधार देखा गया; 2024 में कुल निर्यात मूल्य 2.8 ट्रिलियन रुपये तक बढ़ा, जिसमें एसएमई का हिस्सा 22 प्रतिशत था। ये आंकड़े राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण 2024 के अनुसार पुष्टि होते हैं और दर्शाते हैं कि छोटे उद्यमों का विस्तार आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन और बाजार पहुंच को समन्वित रूप से बढ़ाया जाए, तो भारत 2030 तक विश्व के शीर्ष पाँच उद्यमशीलता केंद्रों में स्थान प्राप्त कर सकता है। इसके लिए निरंतर नीति समर्थन, निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होगा। वर्तमान में लागू किए जा रहे उपायों की सफलता से भविष्य में अधिक निवेश आकर्षित हो सकते हैं और भारतीय उद्योग का वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ेगा। अंततः, छोटे और मध्यम उद्यमों की स्थायी वृद्धि राष्ट्रीय आर्थिक विकास की नींव को सुदृढ़ करेगी।
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